Thursday, November 8, 2012

मौत


उस एक रात में कई बार मरी हूँ मैं|

सन्नाटा फ़ैला था चारो ओर तुम्हारे न होने से
पूरे आलम में एक अज़ब सी बेचैनी थी
मुझको जमाने की निगाहों से बचाया था क्यूँ
मेरे वजूद पर छाई थी  बदहवासी सी 
अब जैसे दुनयावी आँखों की किरकिरी हूँ मैं|
उस एक रात में कई बार मरी हूँ मैं||

हम तो पहले ही अकेले थे न शिकवा था कोई
तुमने इन बुझते चरागों में रोशनी क्यूँ की?
तोड़ के जाना ही था जब मेरे ख़्वाबों का महल
दरोदीवार में रोगन की चाँदनी क्यूँ की???
इस अहसास से बार-बार मरी हूँ मैं|
उस एक रात कई बार मरी हूँ मैं||

मेरी ख़ामोशियों में क्यूँ आवाज़ें भर दीं
टूटे नगमों को फिर साज़ पे गाया था क्यूँ?
मेरे पन्नों की तो उड़ती थी फटी सी चिंदीयां   
उसे गुलदान में दिल के सज़ाया था क्यूँ?
टूटे किरचों में गुलदान के वहीं बिखरी हूँ मैं|
उस एक रात में कई बार मरी हूँ मैं||  
......................................................तरुणा||

21 comments:

Tanuj Vyas said...

Bahut khoob.... Mere blog par bhi aap saadar aamantrit hain....

Praveen Godheja said...

इस अहसास से बार-बार मरी हूँ मैं|
उस एक रात कई बार मरी हूँ मैं||
................बहुत ही प्यारे शब्द ....अपना अर्थ स्वयं कहते है ...तरुना जी बहुत ही अर्थभाव रचना

Shiv Kumar said...

wouuu bahut sundar rachana aapki di dil bhar aaya

taruna misra said...

Tanj ji ... Bahut Shukriya... :)

taruna misra said...

Praveen ji... bahut aabhaari hoon ki aapko meri rachna pasand aayi... :)

taruna misra said...

Shiv Kumar ji... Bahut Shukriya... aap ki taareef ke liye bahut Aabhaari hoon... :)

shekhar shrivastava said...

तोड़ के जाना ही था जब मेरे ख़्वाबों का महल
दरोदीवार में रोगन की चाँदनी क्यूँ की???
इस अहसास से बार-बार मरी हूँ मैं|
उस एक रात कई बार मरी हूँ मैं||
bahut sundar taruna ji , kaveeta me ek tees mahasoos huyi , jisne dil ko chhoo liya, bahut shubhkamnaayen , shekhar shrivastava

priyanka said...

तोड़ के जाना ही था जब मेरे ख़्वाबों का महल
दरोदीवार में रोगन की चाँदनी क्यूँ की???
इस अहसास से बार-बार मरी हूँ मैं|
उस एक रात कई बार मरी हूँ मैं||

priyanka said...

तोड़ के जाना ही था जब मेरे ख़्वाबों का महल
दरोदीवार में रोगन की चाँदनी क्यूँ की???
इस अहसास से बार-बार मरी हूँ मैं|
उस एक रात कई बार मरी हूँ मैं||

taruna misra said...

Bahut bahut Shukriya.... Shekhar ji... :))

taruna misra said...

Priyanka... Soo many thanksss ... :)))

gope kumar said...

गुलदान में दिल के सज़ाया था क्यूँ?
टूटे किरचों में गुलदान के वहीं बिखरी हूँ मैं|
उस एक रात में कई बार मरी हूँ मैं|| ****bahut marmik

Rajesh Kachhawa said...

wahhh!!!!!!!...bahut khoob.... splendid.

उपासना सियाग said...

hota hai ji aisa bahut baar hota hai ....bahut sundar likha aapne

Rishi said...

हम तो पहले ही अकेले थे न शिकवा था कोई
तुमने इन बुझते चरागों में रोशनी क्यूँ की?
तोड़ के जाना ही था जब मेरे ख़्वाबों का महल
दरोदीवार में रोगन की चाँदनी क्यूँ की???
इस अहसास से बार-बार मरी हूँ मैं|
उस एक रात कई बार मरी हूँ मैं||


वाह बेहद सुन्दरता से सारे भाव उकेरे हैं आपने बधाई स्वीकारें

Rahul Soni said...

Nice lines
such a heart touching post
hats off to you

taruna misra said...

Gope Bhaiya ... bahut hi aabhaari hoon.. :)

taruna misra said...

Rajesh ji... Thanks a lot... :))

taruna misra said...

Upaasna ji ... bahut hi shukraguzaar hoon... :))

taruna misra said...

Rishi ji... Soo many thanksss .. :))

taruna misra said...

Rahul Soni ji.... Many many thankss .. :))