Saturday, November 3, 2012

चाहत


न देखूँगी किसी को अब,तुम्हें देखने के बाद
न बोलूँगी किसी से, तुम्हें सुनने के बाद|

न छुऊँगी किसी को, तुम्हें छूने के बाद
न पहनूँगी कुछ और,तुम्हें ओढ़ने के बाद|

न समझूंगी कुछ फिर, तुम्हें समझने के बाद
न उलझूंगी किसी से, तुम्हें सुलझाने के बाद|

न सोचूँगी कुछ और, तुम्हें सोचने के बाद
न भूलूंगी कभी भी,तुम्हें याद करने के बाद|

न मागूंगी अब कुछ भी, तुम्हें पाने के बाद
न चाहूँगी अब किसी को,तुम्हें चाहने के बाद||
.....................................................तरुणा|| 

5 comments:

shekhar shrivastava said...

न समझूंगी कुछ फिर, तुम्हें समझने के बाद
न उलझूंगी किसी से, तुम्हें सुलझाने के बाद|



बहुत सुंदर खयाल. सुन्दर रचना !

Manu Jazbaat said...

Bemishaal........Hausla......wahhh.........

taruna misra said...

Shekhar ji... bahut bahut Shukriya.. :)

taruna misra said...

Manu Ji... jee Behad Shukraguzaar hoon.. :)

alokmittal17 said...
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