Thursday, March 27, 2014

जरा सी हिमाक़त....!!!



ज़माने से ... बग़ावत कर ली हमने...
किसी से अब .. मुहब्बत कर ली हमने ;

ख़्यालों में बुलाती हूँ  .... उसे मैं...
बस इतनी सी .. हिमाक़त कर ली हमने ;

चमकता चाँद वो .... गर्द-ए-ज़मीं मैं....
है दूरी फ़िर भी .. क़ुर्बत कर ली हमने ;
(क़ुर्बत-नज़दीकी)

कहा ये कब  .. कि वो मेरा ही रहे वो ...
मरूं बांहों में .. हसरत कर ली हमने ;


कहो उसको कि ख़्वाबों में ही ... मिल ले...
के नींदों से  ... इज़ाज़त कर ली हमने ;

मिटूं मैं अब भले ... पा लूं जो उसको...
'तरु' से ख़ुद .. अदावत कर ली हमने..!!

............................................................'तरुणा'...!!!



Zamaaney se .. bagaawat kar li hamne...
Kisi se ab .... muhabbat kar li hamne ;

Khyaalon me bulati hoon.. usey main...
Bas itni see ..... himaaqat kar li hamne ;

Chamakta chaand vo ... gard-e-zameen main...
Hai doori phir bhi ... qurbat kar li hamne ;
(qurbat-togetherness)

Kaha ye kab ...... ki mera hi rahe vo...
Marun baanho me .. hasrat  kar li hamne ;

Kaho usko ki khwaabo me hi ... mil ley....
Ke neendo se ...... izaazat kar li hamne ;

Mitun main ab bhale ... paa lun jo usko....
'Taru'  se khud .... adavat kar li hamne..!!

....................................................................'Taruna'....!!!