Tuesday, January 19, 2016

मुझे बख्श दे..!!!


बख्श दे मुझको सताना छोड़ दे ..
कमसेकम अब याद आना छोड़ दे ;
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मारना है  शौक़ से ख़ंजर उठा ..
तीर नज़रों से चलाना छोड़ दे ;
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बेयकीनी गर मुहब्बत पर तुझे...
प्यार की कसमों को खाना छोड़ दे ;
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तोड़ना था दिल तो वो तोड़ा तो है...
अब मगर टुकड़े चुभाना छोड़ दे ;
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दे इजाज़त नींद भर सो जाऊं मैं ..
ख्व़ाब अब झूठे दिखाना छोड़ दे ;
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दिल जला कर चैन क्यों मिलता नहीं ..
राख़ को तो अब उड़ाना छोड़ दे ;
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उफ़ तेरी  तीख़ी नज़र और ये अदा ...
बिजलियाँ मुझपर गिराना छोड़ दे ;
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मैं अगर नाक़ाबिले-बरदाश्त हूँ ...
जान ले ले मुस्कुराना छोड़ दे ;
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...............................................'तरुणा'...!!!

2 comments:

bl jat said...

Umda

taruna misra said...

आपका बहुत बहुत शुक्रिया... :)