Sunday, August 16, 2015

सन्नाटा .... !!!

 












ज़रा तनहा दिखे जो हम चहक उठता है सन्नाटा..
जब उसकी याद आती है , धड़क उठता है सन्नाटा ;
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जरा सी देर को भी जो , हुए नज़रो से वो ओझल...
किसी कांटे के चुभने सा , कसक उठता है सन्नाटा :
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चले यादो की पुरवाई  , या हों वो चांदनी रातें..
मचलने लगता है ये दिल , बहक उठता है सन्नाटा ;
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ज़रा सी ढील दी देते ही ,  बढ़ी है दूरियां कितनी...
ज़रा सा कस दिया तो फिर , चटक उठता है सन्नाटा ;
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मुहब्बत के बिना हर पल बहुत बेचैन रहता है ..
मिली जब इश्क़ की ख़ुश्बू महक उठता है सन्नाटा ;
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लगाया हमने जो दिल से , कोई भी प्रेम का पौधा..
वो जब भी लहलहाया है लहक उठता है सन्नाटा ;
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मैं जब भी उससे कहती हूँ , चला जा छोड़ के मुझको..
गले मिलके निग़ाहों से छलक उठता है सन्नाटा ;
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हुई बारिश मुहब्बत की , मेरे शानो पे जब जब भी..
इन्हीं बारिश की बूंदों में , खनक उठता है सन्नाटा ..!!

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.....................................................................तरुणा’...!!!
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Zara tanha dikhe jo ham ,  chehak uthta hai sannaata ..
Jab uski yaad aati hi ,  dhadak uthta hai sannaata ;
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Zara si der ko bhi jo  ,  huye nazron se ,  wo ojhal ...
Kisi kaante ke chhubhne sa  ,  kasak uthta hai sannaata ;
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Chale yaadon ki purwaai  ,  ya ho vo chaandni raatein..
Machalne  lagata hai  ye dil  , behak uthta hai sannaata ;
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Zara bhi dheel dete hi  ,  badhi  hain dooriyaan kitni
Zara sa kas diya to phir ,  chatak uthta hai sannaata ;
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Muhabbat ke bina har pal , bahut bechain rahta hai..
Mili jab ishq ki khushboo ,  mehak uthta hai sannaata ;
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Lagaya hamne jo dil se , koi bhi prem ka paudha...
Wo jab bhi lahlaahaya hai ,  lehak uthta hai sannaata ;
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Main jab bhi ussey kahti hun  , chala  ja chhod  kar mujhko ..
Gale mil ke,  nigaahon se  chhalak uthta hai sannaata ;
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Huyi baarish muhabbat ki , mere shano pe jab jab bhi..
Inheen baarish ki boondo me , khanak uthta hai sannaata ...!!
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...................................................................................'Taruna'...!!!


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