Monday, December 10, 2012

मेरा छोटा सा आकाश....


कौन तय कर पाया है?????
आसमानों की सरहदों को....
न मुझ जैसी धरा...न कोई चाँद सितारा...
फैला है....तुम्हारा वज़ूद.....
न जाने...कहाँ कहाँ तक...
न मैं जान पाई हूँ..न कोई और..
तुम्हारा विस्तार है...अनंत तक..
न कोई ओर है...न छोर...
तुम हो अनंत..शाश्वत और विस्तृत...
मैं एक बहुत छोटी सी धरा...
चाहा नहीं की नापू कभी..तुम्हारे..
विस्तार को....दामन को...
मैं तो बस खुश हूँ..अपने हिस्से का..
आकाश पा कर.....
और...सच कहूँ....तो वही हैं..
मेरे लिए पूरा विस्तार...पूरा आकाश..
जो मुझको ढक लेता है...
पूरा का पूरा...अपने दामन में..
समेट लेता है..अपनी बाँहो में..
मेरी गहराइयों को....
और मैं...उस टुकड़े-टुकड़े आकाश को ही...
बस...मानती हूँ....जानती हूँ....
पूरा अंतरिक्ष विशाल..न मेरा था कभी..
तुम समेटों चाहे..हज़ारों मुझसी धराओं को..
अपने अंदर...अपनी विशालता में...
मुझे तो मिल गया है.....
मेरा विस्तार...मेरा आसमान...मेरा आकाश..
बस...वही है मेरा...सिर्फ़ मेरा...
..........................................तरुणा||



13 comments:

Mahima Mittal said...

lovely ... beautiful poem

taruna misra said...

Mahima....bahut bahut shukriya...:)

rajeev mohan said...

बहुत खूब,, तरूणा जी,

taruna misra said...

राजीवजी...बहुत बहुत आभार...:)

pawan jain said...

मुझे तो मिल गया है.....
मेरा विस्तार...मेरा आसमान...मेरा आकाश..
बस...वही है मेरा...सिर्फ़ मेरा...behad khoobsurat rachna

taruna misra said...

Pawan ji.... bahut bahut Shukriya... :)))

shailendra rana said...

बहुत खूब है आपके हिस्से का आसमान , वाह , क्या बात :)

taruna misra said...

Shailendra ji... bahut shukriya.. :)

Manu Jazbaat said...
This comment has been removed by the author.
Manu Jazbaat said...

Muhabbat ka SAZDA..............Har ek ke baski baat nahi..........BAHUT KHOOB...............

नरेन्द्र कुमार सिंह (नीरू ) said...

बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति

taruna misra said...

Manu ji.... bahut bahut shukriya.. :)))

taruna misra said...

Narendra Kumar ji... bahut Shukraguzaar hoon..:)