Friday, January 25, 2013

26 जनवरी.....


आ गई फिर से 26 जनवरी....
एक और प्रतीक हमारे लोकतंत्र का...गणतंत्र का....
मनाओ त्यौहार.....सजाओ बाज़ार.....
दिखाओ तो....जरा सा उत्साह....
क्यूँ नहीं...दिखा पा रहे हो...
क्या कहा...नहीं मना पाओगें ख़ुशियाँ.....
तो कारण खोजो....ढूँढो खोए हुए भारत को....
उसकी आत्मा को...जो दबी कुचली पड़ी है...
कहीं हमारे ही क़दमों तले...कहीं राख़ बनी हैं...
या धूल में मिल चुकी हैं...हमारे पैरों से ही...
करो कुछ विचार...कुछ तो इलाज़ सोचो....
क्यूँ आत्मा मर गई हैं.....इसकी....
या जीवित हैं अभी तक...शायद मृतप्राय है..अब तक...
शायद बच जाए.....कर लो उपचार...
क्यूँ हैं हम इतने बिचारे...इतने लाचार.....
अपने रहनुमाओं के हाथों....लुटे-पिटे.....

करो कुछ तो....विचार....
दो अपनी संभावनाओं को..जरा सा विस्तार....
झाँकों अपने दिलों में...गहरें तक...
बदलो समय के साथ...वरना....
याद रखो...ये समाज़ में फ़ैला हुआ कुष्ठ.....
ये संकीर्णता...छल...हमें ही निगल जाएगा....
बातें मत करो...सिर्फ़ अपने अधिकारों की.....
कुछ तो याद करो...अपने कर्तव्यों की....
मानवता का करो तो विस्तार जरा सा....
कब तक ये लूट-खसोट..चोरी..डकैती...बलात्कार...
के सुन सुन के समाचार.....
कोसते रहोगे...व्यवस्था को...
अपनी लाचार अवस्था को....

क्या हम नहीं हैं..जरा भी जिम्मेदार...
अपनी ही गिरती अवस्था के...हालात के...
मत लगने दो....हिंसा...झूठ...छल...कपट का बाज़ार....
जब हम ही नहीं...इनका सौदा करेंगे....??
तो कैसे ये बाज़ार चलेंगे...??
न होंगे खरीदार जब..इन दूषित भावनाओं के....
तो क्या नहीं आएगा बदलाव...हमारी कामनाओं में...
हम बदलेंगे तो बदलेगा...समाज़ भी....
और आगे बढेगा हमारा.....ये देश भी...
अब भी सोये रहें तो क्या पाओगें...??
पहल करो....उठाओ परचम...बदलो स्वयं को....
वातावरण शुद्ध हो जाएगा...ले पाओगे खुली हवा में साँस...
आज़ादी की साँस....महकता वातावरण......
अपना ये देश....अपना ये चमन.....

...........................................................'तरुणा'.....!!!




3 comments:

Prajwal said...

Test

Prajwal said...

I am re writing .... pahle waala na jaane kaise gaayab ho gaya ....

Maen ye kahna chahta hoon ki ... aap ki kavita kaafi niraashajanak lagti hai .. although I am not competent to comment, as , kuch maheenon se maen Indian affairs se poora update nhii hoon .... lekin itna jaroor Prarthana karunga .. ki har bhartiya aatma jagrut ho aur rahe apne rights and duties ke prati ...fir wakt nhii lagega .. sapne poora hone mein ... Prajwal ( RozRose Smile .. :)

taruna misra said...

Roz Rose Smile jiii.....aap ke kathan se main sahmat nahin hoon....infact meri poem to kaafi inspiring hain...aaj aap kisi se bhi baat kariye....log bahut depressed hain...Indian politics ko lekar....maine to unko ye sandesh diya hain ki....rone se kuchh nahin hoga....aap khud ko badaliyen....tabhi samaaj badlega...apne rights ki hi baat mat kariye....duties bhi yaad rakhiye....infact...main to unko jagaane ka kaam kar rahi hoon...thanksss...:)