Thursday, December 19, 2013

अधूरे अल्फ़ाज़... !!!






अल्फ़ाज़ जाने कितने ... मुंह में अटक रहें हैं....
कितने ही किस्से रस्ते में ... मेरे भटक रहें हैं...  

बारिश..तूफ़ान इतने क्यूँ आए.. पता चला अब..
ज़ुल्फ़ें उन्होंने खोली... वो बादल झटक रहें हैं..

निगाहें मिली हैं जब से .. उस ज़ालिम से मेरी..
ग़ज़ले बहक रहीं हैं ...और शेर भटक रहें हैं...

चिलमन के पीछे जाके ... क्यूँ छुप गया है वो...
मुश्किल से जुदाई का .. हम गम गटक रहें हैं..

नज़रो से तेरी पहले ही ... बेहोश है ये दुनिया...
नींद आती नहीं है न ही..कोई ख्व़ाब फटक रहें हैं..

सुखन 'तरु' के अब तो .. उनको भी खटक रहें हैं..
क़ैद रखा जिसमे मुझको .. वो किलें चटक रहें है...

.................................................................'तरुणा'.... !!!


Alfaaz jaane kitne .... munh me atak rahen hain..
Kitne hi kisse raste me .. mere  bhatak rahen hain..

Baarish .. tufaan itna kyun aaye .... pata chala ab...
Zulfen unhone kholi .... vo baadal jhatak rahen hain...

Nigaahen mili hain jab se .... us zaalim se meri ...
Ghazlen bahak rahin hai.. aur sher bhatak rahen hain..

Chilman ke pchhe jaake .. kyun chhup gaya hai vo..
Mushqil se judaayi ka ... ham gam gatak rahen hain.. 

Nazron se teri pahle hi.... behosh hai ye duniya...
Neend aati nahi hai na hi.. koi khwaab fatak rahen hain..

Sukhan 'Taru' ke ab to ... unko bhi khatak rahen hain..
Qaid rakha jisme mujhko.. vo qile chatak rahen hain..

................................................................................'Taruna'... !!!







Monday, December 16, 2013

कब से है.... !!!






















हमको उस बेदर्द का...इंतज़ार कब से है...
राहों में बिछी हुई.... दस्तार कब से है....
(दस्तार-पगड़ी)

मैं मुफ़लिसी में पली...तू चरागां अमीरों का...
हमारे बीच ये ऊंच-नीच की..दीवार कब से है...

रफ़्तार मोहब्बत की रोक सका.. न गम-ए-दौरां भी मेरी..
ये हुस्न-ए-माहताब उसके इश्क़ में...निसार कब से है...

तवील शब को काटती हूँ .... उस एक चांद को देख मैं...
गर्चे...आसमां पे सितारें तो .... बेशुमार कब से हैं......
(तवील-लम्बी...गर्चे-हालाकि)

नाख़ुदा ने छोड़ा है मुझे...तूफ़ान-ए-समंदर में...पर...
गुंज़ाइश बची है अभी..मेरे हाथों में पतवार कब से है..

सिमट सका न फ़ैलाव...ज़िंदगी का तरु' से कभी भी..
वरना जीना तो सबके ही लिए.. दुश्वार कब से हैं.....

.................................................................'तरुणा'....!!!


Hamko us bedard ka.....intzaar kab se hai....
Raahon me bichhi huyi...dastaar kab se hai...
(dastaar-turban)

Main muflisi me pali....too charaagan ameeron ka...
Hamare beech ye oonch-neech ki...deewaar kab se hai..

Raftaar mohabbat ki rok saka na.. gam-e-dauran bhi meri..
Ye husn-E-maahtaab uske ishq me...nisaar kab se hai....

Us ek chaand ko dekh kaat'ti hoon...taveel shab ko main...
Garch-e...aasmaan pe sitaare to...beshumaar kab se hain...
(taveel-long...garch-e---though)

Nakhuda ne chhoda hai mujhe..toofaan-e-samandar me...par..
Gunzaaish bachhi hai abhi...mere haathon me patvaar kab se hai...

Simat saka na failaav... Zindgi ka 'Taru' se kabhi bhi...
Varna jeena to sabke liye...dushvaar kab se hai....

....................................................................................'Taruna'...!!!

Friday, December 13, 2013

बहुत दिन बाद.... !!!





टकरा गए वो दफ्फतन ...हमसे इक ज़माने के बाद...
नीची निग़ाह क्यूँ थी ....  ढेरों सितम ढाने के बाद...

महफ़िल में दाद मिलती रही ... देर तक मुझे ...
रोता रहा न जाने क्यूँ ... वो मेरे गाने के बाद...

ठुकरा के वो गए थे इस .. कूचा-ए-दिल को कल...
क्यूँ ढूंढते हैं अब मुझे .. वो ग़ैर को पाने के बाद ...

सोचा था भीगूंगी मैं ख़ूब ... बरसात में अबके...
बरसे बिना गुज़र गए ये .. अब्र भी छाने के बाद ...

कमजोरियों.. महरूमियों का ... शिकवा नहीं है अब...
पुरअसर तो हो गई 'तरु'.. कलम को उठाने के बाद ....

.....................................................................'तरुणा'...!!!


Takra gaye vo daf'fatan .. hamse ik zamaane ke baad ...
Neechi nigaah kyun thi .. dheron sitam dhane ke baad ...

Mehfil me daad milti rahi ......  der tak mujhe ....
Rota raha na jaane kyun .. vo gair ko paane ke baad...

Thukra ke vo gaye the .... iss kucha-e-dil ko kal ...
Kyun dhoondhte hain ab mujhe ... vo gair ko paane ke baad ...

Socha tha ki beegungi main khoob .. barsaat me abke...
Barse bina guzar gaye ye ...  abr bhi chhane ke baad ..

Kamjoriyon  .. mehroomiyon .... ka shiqwa nahi hai ab ...
Purasar to ho gayi 'Taru' ...  kalam ko uthane ke baad ...


............................................................................'Taruna'..... !!!



Monday, December 9, 2013

किसका क़ुसूर.... ???



वो रूठते हैं खुद ही ... और मनाए भी हम ही....
हर बार उनकी राह में .. पलकें बिछायें हम ही....

जब बोलते हैं हम पलट के .. न देखें एक नज़र भी..
हम भी न जब देखें .... तो कुसूरवार भी हम ही...

हमने कब कहा था ... दिल लगा लो हम से ही..
अब दे दिया हमको दिल .. तो गुनहगार भी हम ही..

जब देते थे तवज्जो .. तो भाव खाते थे वो जनाब....
अब कहते हैं कि उनसे बढ़के ... तलबगार हम नहीं..

सवाल सारे उनके .... फ़ैसलें भी लें वो खुद ही.....
ये कैसी अदालत है....कि जवाबदार भी हम नही...

सारे जहाँ में शोर मचाते हैं ... अपनी मुहब्बतो का..
अरे...दिया है जो हमको दिल ..क्या हक़दार हम नही..

................................................................'तरुणा'... ||


Vo roothte hain khud hi ... aur manaye bhi ham hi....
Har baar unki raah me .... palken bichhayen ham hi ...

Jab bolte hain ham palat ke ... na dekhen ek nazar bhi... 
Ham bhi na jab dekhen ... to  Qasoorwaar  bhi ham hi ... 

Hamne kab kaha tha ...  dil laga lo ham se hi ...
Ab de diya hamko dil .. to gunahgaar bhi ham hi.. 

Jab dete the tavajjo ... to bhaav khaate the vo janaab ..
Ab kahte hain ki unse badhke ... talabgaar ham nahi ...

Sawaal saare unke .... faisle bhi len vo khud hi ...
Ye kaisi adaalat hai .. ki jawaabdaar bhi ham nahi ...

Saare jahan me shor machaate hain .. apni muhabbaton ka ..
Arey .. diya hai jo hamko dil .. kya haqdaar ham nahin..


................................................................................. 'Taruna'.... !!!
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Friday, December 6, 2013

मेरी राहें... .. !!!







ख़ुद को पा लूं तो.... ग़ज़ब का वो मंज़र होगा....
अब हर गम मेरे लिए..पहले से तो कमतर होगा...

आज ग़मगीन हूँ...मगर इतनी भी मायूस नहीं...
जानती हूँ मेरा कल...आज से तो बेहतर होगा...

मैं कोई शमशीर नहीं...काट दूं सारी दुनिया को...
मेरी रूह पे बनावट का न...कोई बख्तर होगा...

यूँ तो पुरदर्द थीं राहें... 'तरु' की अब तक सारी...
मेरी पुख्तगी कि तारीफ़ में..ख़ुदा भी पेश्तर होगा...

(पुरदर्द-दर्द से भरी.. पुख्तगी-मज़बूती ..पेश्तर-सर्वप्रथम)


...........................................................'तरुणा'...!!!

Khud ko paa loon to...ghazab ka vo manzar hoga....
Ab har gam mere liye...pahle se to kamtar hoga...

Aaj gamgeen hoon...magar itni bhi maayoos nahi....
Jaanti hoon mera kal.... aaj se to behtar hoga.....

Main koi shamsheer nahi...kaat doon main saari duniya ko...
Meri rooh pe banavat ka na.....koi bakhtar hoga...

Yun to purdard thi raahey...'Taru' ki ab tak saari....
Meri pukhtagi ki tarif me...Khuda bhi peshtar hoga...

(purdard-painful.. pukhtagi-maturity.. peshtar-first of all)

....................................................................................'Taruna'...!!!






Monday, December 2, 2013

अब कहाँ... ?????




करे चोट हुक्मरानों पे...वो तर्ज़े-क़लम अब कहाँ....???
ग़ुरबत में जो काम आए....वो धनवान अब कहाँ....???

हवाओं से हिल उठतीं हैं.... इमारतें अब तो....
जो झेलें ज़लज़लों को..वो बुनियाद अब कहाँ..??

बख़्शीश दे गये वो...मुझको मेरी मोहब्बत का....
दरियादिली उनकी सी...ज़माने में और कहाँ..???

संगतराश तोड़ने लगें हैं बुत...अपने ही हाथों...
किसी और बुतशिक़न की....दरकार अब कहाँ....???

(बुतशिक़न-मूर्ति तोड़ने वाला)

फ़ानी है ज़िंदगी भी...... न रहेंगें हम हमेशा.....
इस कसफ़ से 'तरु' की....कोई पहचान अब कहाँ...???

(कसफ़-भीड़)

..............................................................'तरुणा'......!!!

Karey chot hukmraano pe...vo tarze-qalam ab kahan...??
Gurbat me jo kaam aayen...vo dhanwaan ab kahan...????

Havaon se hil uthtin hain...imaartey ab to....
Jo jhele zalzalon ko...vo buniyaad ab kahan..??

Bakhshish de gaye vo...mujhko.meri mohabbat ka...
Dariyadili Unki sii...zamaney me aur kahan....???

Sangtaraash todne lagen hain...but apne hi haathon...
Kisi aur butshiqan ki... darkaar ab kahan......?????

(butshiqan-one who breaks idol)

Faani hai zindgi bhi..... na rahengey ham hamesha....
Is qasaf se 'Taru' ki.....koi pehchaan ab kahan.... ???

(qasaf-crowd)

...........................................................................'Taruna'....!!!